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Saturday, 28 March 2015

अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न से सम्मानित : समान्य ज्ञान

अटल बिहारी वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 27 मार्च, 2015 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके घर पर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति भवन में दिए जाने की परंपरा है, लेकिन बीमारी के चलते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल से हटकर उन्हें घर जाकर यह सम्मान दिया। 1998 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी बीमारी के चलते काफी समय से सार्वजनिक जीवन से दूर हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। 

ग्वालियर में 25 दिसंबर, 1924 को जन्मे वाजपेयी पहले जनसंघ फिर बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष रहे। तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने, जिनका कांग्रेस पार्टी से कभी नाता नहीं रहा। साथ ही वह कांग्रेस के अलावा के किसी अन्य दल के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरे से जुडे होने के बावजूद वाजपेयी की एक धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी छवि है। उनकी लोकप्रियता भी दलगत सीमाओं से परे है।

करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि के रुप में प्रख्यात वाजपेयी को साहसिक पहल के लिए भी जाना जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री के रुप में उनकी 1999 की ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा शामिल है, जब पाकिस्तान जाकर उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

वाजपेयी और प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं स्वतंत्रता सेनानी महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा 24 दिसम्बर को की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि वाजपेयी और मालवीय दोनों का जन्मदिन 25 दिसंबर है। वाजपेयी का जन्म इस तारीख को 1924 में और मालवीय का जन्म 1861 को हुआ था।

महामना को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। उनके परिजनों को 30 मार्च को राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार दिया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मालवीय इस पुरस्कार से नवाजे जाने वाली 44वीं व 45वीं हस्ती हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी-
जन्म : 25 दिसंबर, 1924, ग्वालियर
पिता : श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी
माता : श्रीमती कृष्णा देवी
शिक्षा : स्नातकोत्तर (राजनीति शास्त्र)
राज​नीति : 1957 में पहली बार बलरामपुर, उत्तर प्रदेश लोकसभा सीट से सांसद बने। वे चौथी, 5वीं, 6वीं, 7वीं और फिर 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा के सदस्य रहे। वह 1962 और 1986 में दो बार राज्यसभा के लिए भी चुने गए। वह इकलौते ऐसे सांसद हैं, जो भिन्न-भिन्न समय में चार राज्यों–उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली लोकसभा सीटों से चुने गए।
प्रधानमंत्री : 16–31 मई, 1996 एवं 19 मार्च, 1998 से 13 मई, 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान मिला। राष्ट्रीय राजनीति के साथ उनका पहला परिचय 1942 में हुआ, जब उन्होंने छात्र जीवन के दौरान 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया।
राष्ट्रधर्म (मासिक), पांचजन्य (साप्ताहिक) और स्वदेश व वीर अर्जुन (दैनिक) पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और संस्थापक अध्यक्ष बने।

भारत रत्न से सम्मानित प्रधानमंत्री-
पंडित जवाहर लाल नेहरू : 1955
लाल बहादुर शास्त्री : 1966 (मरणोपरांत)
इंदिरा गांधी : 1971
मोरारजी देसाई : 1991
राजीव गांधी : 1991 (मरणोपरांत)
अटल बिहारी वाजपेयी : 2014

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मानव विकास सूचकांक


मानव विकास सूचकांक की परिभाषा:
यह शिक्षा, आय व जीवन प्रत्याशा का मिला सांख्यिकीय रूप है जो कि राष्ट्रों के मानव विकास के लिए चार स्तर पर विभाजित करता है.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने 2010 में मानव विकास के आकलन के लिए कुछ नये सूचियाँ प्रदान की हैं.

निम्न 3 सूचियाँ इस प्रकार हैं :
- जीवन प्रत्याशा सूची
- शिक्षा
- आय
इस प्रकार अब मानव विकास सूचकांक उपर दिए गये तीनों सूचियों की ज्यमितीय गणना होती है.

उत्पत्ति

मानव विकास सूचकांक को सर्वप्रथम महबूब-उल-हक द्वारा बननाया गया जिसे बाद में अमर्त्य सेन द्वारा आगे बढ़ते हुए 1990 में यूएनडीपी द्वारा जारी किया गया.

अंतर सामंजस्य (इनेक्वालिटी- अड्जस्टमेंट) मानव विकास सूचकांक:

मानव विकास सूचकांक राष्ट्र के मानव विकास का औसत होता है जो कि मूलतः 3 सूचियों पर आधारित रहता है, शिक्षा, आय व स्वास्थ्य. सभी अन्य औसत की तरह ही यह भी जनसंख्या में उपस्थित असमानता को छिपाता है.

दो राष्ट्रों के मध्य अगर भिन्न भिन्न वितरण के बाद भी औसत के समय अंतर नहीं रह जाता. मानव विकास सूचकांक राष्ट्रों के शिक्षा, आय व स्वास्थ्य का औसत ही नहीं बताता बल्कि यह जनसंख्या में फैले सभी वितरण पर ध्यान आकर्षित करता है जो की एक स्तर पर आसमान हों.

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भूमि अधिग्रहण विधेयक


भारत में 2013 क़ानून के पास होने तक भूमि अधिग्रहण का काम मुख्यत: 1894 में बने क़ानून के दायरे में होता था. लेकिन मनमोहन सरकार ने मोटे तौर पर उसके तीन प्रावधानों में बदलाव कर दिए थे. ये भूमि अधिग्रहण की सूरत में समाज पर इसके असर, लोगों की सहमति और मुआवज़े से संबंधित थे. पिछले साल दिसंबर में मोदी सरकार ने एक अध्यादेश लाया. यूपीए के भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ बदलाव करते हुए. लेकिन विपक्ष को ये बदलाव खटक रहे हैं. आइए, जानते हैं इस बिल से जुड़ी बारीकियों के बारे में-

1. समाज पर असर वाले प्रावधान को ख़त्म किया गया है
सोशल इंपैक्ट असेसमेंट की मदद से ये बात सामने आ सकती थी कि भूमि लिए जाने से वहां के समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि भूमि अधिग्रहण का असर सिर्फ बड़े किसानों या जमीन मालिकों पर ही नहीं होता, छोटे किसान और मजदूर भी वहां होते हैं, जो वर्षों से उस जमीन पर काम कर रहे होते हैं. यदि जमीन ले गई तो वे क्या करेंगे, कहां रहेंगे.

2. लोगों की रज़ामंदी हासिल करने से छुटकारा
2013 के क़ानून में एक प्रावधान रखा गया था लोगों से सहमति लेने का. सरकार और निजी कंपनियों के साझा प्रोजेक्ट में प्रभावित जमीन मालिकों में से 80 फीसदी की सहमति जरूरी थी. सरकारी परियोजनाओं के लिए ये 70 प्रतिशत था. नए क़ानून में इसे ख़त्म कर दिया गया है. रक्षा, ग्रामीण बिजली, ग़रीबों के लिए घर और औद्योगिक कॉरीडोर जैसी परियोजनाओं में 80 फीसदी लोगों के सहमिति की आवश्यकता नहीं होगी.

3. नहीं बढ़ा मुआवज़ा
संशोधन में भी मुआवज़े की दर को पहले जैसा ही रखा गया है. जमीन की कीमत के बाजार मूल्य का ग्रामीण इलाकों में चार गुना और शहरों में दोगुना. फर्क सिर्फ इस बात का है कि सामाज पर पड़ने वाले असर के प्रावधान को खत्म करके सरकार ने मुआवजे की सीमा सिर्फ उन्हीं लोगों तक सीमित कर दी है, जिनके नाम जमीन है. जबकि पुराने कानून में ऐसे सभी लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान था, जो उस जमीन पर निर्भर हैं.

4. जमीन बंजर हो या उपजाऊ फर्क नहीं पड़ेगा
सरकार ने जिन पांच सेक्टरों को प्राथमिकता की सूची में डाला है, उनके लिए जमीन अधिग्रहण करते वक्त यह नहीं देखा जाएगा कि वह जमीन बंजर है या उपजाऊ. जैसा कि सिंगूर के मामले था. अब बिना कोई पूछताछ के उसे सरकार ले लेगी.

5. 13 और कानूनों को भूमि अधिग्रहण में शामिल कर लिया
इस कदम को किसानों के पक्ष में माना जा रहा है. देश में 13 कानून और हैं, जिनके तहत जमीन तो अधिग्रहित की जाती है. लेकिन मुआवजे और पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी. अब भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ऐसे सभी मामलों में मुआवजा दिया जाएगा और पुनर्वास कराया जाएगा. जिन मामलों में इसका फायदा मिलेगा, वे हैं नेशनल हाईवे एक्ट, एटॉमिक एनर्जी एक्ट, पेट्रोलियम एंड मिनरल पाइप लाइंस एक्ट, इलेक्‍ट्रिसिटी एक्ट आदि.


भूमि अधिग्रहण विधेयक (बिल) क्या है?


भूमि अधिग्रहण विधेयक ज़मीन के अधिग्रहण और पुनर्वास के मामलों को एक ही क़ानून के तहत लाए जाने की योजना है। वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने संसद में भूमि अधिग्रहण बिल पास किया था। जिसमें किसानों के हित के लिए कई निर्णय लिए गये थे। फिलहाल भारत में जमीन अधिग्रहण 1894 में बने कानून के तहत होता है।

29 अगस्त, 2013 को लोकसभा से पारित होने के बाद इस विधेयक को 4 सितंबर, 2013 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में बिल के पक्ष में 131 और विरोध में 10 वोट पड़े वहीं लोकसभा में 216 पक्ष में और 19 मत विरोध में पड़े थे।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक 119 साल से चल रहे ब्रिटिश हुकुमत वाले भूमि अधिग्रहण बिल की जगह ले लेगा। एक सदी से चल रहे भूमि अधिग्रहण बिल की कई खामियां को इसमें सुधारा गया है।

आइये अब जा‍नते हैं, यूपीए सरकार और मोदी सरकार के अध्यादेश में अंतर क्या है?

यूपीए सरकार का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश
जबरन अधिग्रहण नहीं – किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण की इजाजत नहीं देता था। इसके लिए गांव के 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी थी।

5 वर्ष तक इस्तेमाल नहीं करने पर भूमि वापसी का प्रावधान – अधिग्रहित भूमि पर अगर 5 वर्ष में विकास नहीं हुआ तो वही भूमि फिर से किसानों को वापस मिलने की भी व्यवस्था की गई थी।

बंजर भूमि का ही अधिग्रहण – बहुफसली सिंचित भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा। जमीन के मालिकों और जमीन पर आश्रितों के लिए एक विस्तृत पुनर्वास पैकेज की व्यवस्था की गई थी।

अधिग्रहण के खिलाफ किसान कोर्ट जा सकते थे – 2013 के कानून में यह व्यवस्था की गई थी कि अगर किसी ज़मीन के अधिग्रहण को कागज़ों पर 5 साल हो गए हैं, सरकार के पास जमीन का कब्जा नहीं है और मुआवज़ा नहीं दिया गया, तो मूल मालिक ज़मीन को वापस मांग सकता है।

मोदी सरकार का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश

2014 में आयी मोदी सरकार ने एक नया अध्यादेश जारी किया और 2013 के कानून की कई व्यवस्था को बदलते हुए नये संसोधन किये–

सहमति जरूरी नहीं – अब किसानों की सहमति जरूरी नहीं। नए कानून में इसे ख़त्म कर दिया गया है।

भूमि वापसी का कोई प्रावधान नहीं – अगर सरकार ने जमीन लेने की घोषणा कर दी और उस भूमि पर कोई काम शुरू हो या नहीं यह जमीन सरकार की हो जाएगी।

उपजाऊ एवं सिंचित भूमि का भी अधिग्रहण – यूपीए सरकार में यह व्यवस्था थी कि सरकार खेती योग्य जमीन नहीं ले सकती लेकिन नये अध्यादेश के मुताबिक सरकार खेती लायक और उपजाऊ जमीन भी ले सकती है।

अधिग्रहण के खिलाफ किसान कोर्ट नहीं जा सकते हैं – अगर सरकार किसी की जमीन ले लेती है तो वह इसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में सुनवाई के लिये नहीं जा सकता।

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रेल बजट 2015-16 की खास घोषणाएं


रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 26 फरवरी, 2015 को संसद में 2015-16 के लिए अपना पहला रेल बजट पेश किया। इसमें उन्होंने यात्रियों पर कोई बोझ नहीं बढ़ाया और न ही किराए में काई बढ़ोतरी की, लेकिन नई ट्रेनों की भी घोषणा नहीं की गई। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट में यात्री सुविधाएं को और बढ़ाने पर जोर दिया।

रेल बजट 2015-16 की खास घोषणाएं इस प्रकार है–
- रेल बजट में यात्री किराये में कोई बढ़ोत्तरी नही की गई
- वित्त वर्ष 2016 में रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए 96,182 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- ट्रेनों और प्लेटफॉर्म की सफाई के लिए अलग से स्वच्छता विभाग बनाने की योजना
- 650 रेलवे स्टेशनों पर 17 हजार नए टायलेट बनाए जाएंगे
- यात्रियों की शिकायतों के लिए नया हेल्पलाइन नंबर 138 और सुरक्षा के लिए नंबर 182 जारी किया जाएगा
- 108 गाडि़यों में ई-कैटरिंग सुविधा उपलब्ध कराने का संकल्प
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएंगे
- अशक्त लोगों के लिए व्हील चेयर भी ऑनलाइन बुक कराने की सुविधा देने का प्रस्ताव
- लोकल टिकट वेंडिंग मशीन की संख्या बढ़ाने के साथ वॉटर वेंडिंग मशीन भी लगाने का प्रस्ताव
- देश के 400 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी
- यात्री अब 60 दिन की जगह 120 दिन पहले अपनी टिकट बुक करा सकेंगे
- 10 स्टेशनों पर सेटेलाइट सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा
- नौ रेल मार्गों पर 160 से 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने की घोषणा
- मानव रहित 3438 फाटक खत्म होंगे, बिना गार्ड वाले फाटक पर अब अलार्म बजेगा
- रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जायेगा
- स्टेशन और गाड़ियों को कंपनियों के नाम दिये जाएंगे, कंपनियों को इसके लिए रेलवे को पैसा देना होगा
- इसी वर्ष दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक्शन प्लान लागू किया जाएगा
- जनरल बोगियों में भी मोबाइल चार्ज की सुविधा देने के साथ स्लीपर में चार्जिंग प्वाइंट बढाए जाएंगे
- अब सेना जवानों को टिकट के लिए वारंट दिखाने की जरूरत नहीं होगी
- कई भारतीय भाषाओं में ई-टिकट पोर्टल शुरू किए जाएंगे
- बिना रिजर्वेशन वाली टिकटों के लिए 'ऑपरेशन 5 मिनट' शुरू किया जाएगा, जिसमें 5 मिनट पहले टिकट लिया जा सकता है
- उत्तर-पूर्व को भी दिल्ली से जोड़ने के लिए ट्रेन चलाने की घोषणा
- अगले पांच वर्षों में रेलवे में 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य
- रेल की दैनिक यात्रा परिवहन क्षमता को 2.1 करोड़ से बढ़कर 3 करोड़ करने की योजना
- गाडि़यों को तेज चलाने जिससे यात्रियों का 20 प्रतिशत समय बचेगा की योजना
- माल ढुलाई क्षमता को बेहतर कर और इसे बढ़ाया जाएगा
- आईआरसीटीसी वेबसाइट पर पसंदीदा खाना ऑनलाइन बुक कराने की सुविधा
- रेलवे की हालत सुधाने के लिए सांसद निधि से भी पैसा लिया जाएगा
- बड़े स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर लगाने के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान
- कागज रहित (पेपरलेस) टिकटिंग सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव
- बहु-भाषा ई-टिकटिंग सिस्टम शुरू किया जाएगा
- रेलवे की ढुलाई क्षमता को एक अरब टन से बढाकर 1.5 अरब टन किया जाएगा
- रेलवे की यात्री क्षमता 21 मिलियन से बढ़ाकर 30 मिलियन करने का लक्ष्य
- ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने, पटरियों को चौड़ा करना और विद्युतीकरण मुख्य फोकस
- नई ट्रेनों का एलान अभी नहीं होगा, समीक्षा के बाद नई ट्रेनों का एलान होगा।

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आम बजट 2014-15 के मुख्य बिन्दु


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्तीय वर्ष 2015-16 का आम बजट लोकसभा में 28 फरवरी, 2015 को पेश किया। आम बजट 2015-16 के मुख्य बिदुं इस प्रकार हैं–


आम बजट 2014-15 के सभी मुख्य बिन्दु पढ़े
● इनकम टैक्‍स छूट सीमा में कोई बदलाव नहीं, पुराना टैक्‍स स्‍लैब ही लागू होगा।
● कॉरपोरेट टैक्‍स दर को अगले 4 साल में घटाकर 30 फीसदी से 25 फीसदी किया जाएगा।
● प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बीच अंतर को समाप्त किया जायेगा।
● श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद भारतीय वित्तीय संहिता संसद में पेश की जायेगी
● सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी की स्थापना करके भारतीय बांड बाजार को और व्यापक बनाया जायेगा
● पूंजी प्रवाह पर सरकार को स्पष्ट नियंत्रण देने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून में संशाधन किया जायेगा
● पीपीपी माडल की समीक्षा की जायेगी और कारोबार करने को सुगम बनाया जायेगा
● नये कर प्रस्तावों से 15,068 करोड़ रूपये के राजस्व की प्राप्ति का अनुमान ।
● व्यक्गित करदाताओं को सालाना 4,44,200 रूपये की आय पर विभिन्न प्रावधानों के तहत छूट उपलब्ध होगी।
● पेंशन योजना में सालाना 50 हजार रूपये तक के योगदान पर कर छूट। कर्मचारियों की मासिक परिवहन भत्ता कर छूट को 800 रूपये से बढ़ाकर 1600 रूपये किया गया ।


सस्ता हुआ :  चमड़े का समान, 1000 रुपए उपर चमड़ का समान सस्ता होगा। विदेश से आने वाले कलपुर्जे सस्ता होगा।

महंगा हुआ : सिगरेट, तंबाकू, गुटखा, सर्विस टैक्स महंगा होगा, सर्विस टैक्स बढ़ाकर 12.36% से बढ़ाकर 14% किया गया। एसी रेस्टोरेंड में खाना, पार्लर जाना, कुरियर भेजना, क्रेडिट कार्ड और डेविट कार्ड से भुगतान करना, अस्पताल में इलाज कराना, घर खरीदना, हवाई यात्रा, फोन बिल, केवल TV और वाईफाई  भी महंगा।

● इनकम टैक्‍स छूट सीमा में कोई बदलाव नहीं, पुराना टैक्‍स स्‍लैब ही लागू होगा।
● कॉरपोरेट टैक्‍स दर को अगले 4 साल में घटाकर 30 फीसदी से 25 फीसदी किया जाएगा।
● प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बीच अंतर को समाप्त किया जायेगा।
● सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी की स्थापना करके भारतीय बांड बाजार को और व्यापक बनाया जायेगा
● पूंजी प्रवाह पर सरकार को स्पष्ट नियंत्रण देने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून में संशाधन किया जायेगा
● पीपीपी माडल की समीक्षा की जायेगी और कारोबार करने को सुगम बनाया जायेगा
● नये कर प्रस्तावों से 15,068 करोड़ रूपये के राजस्व की प्राप्ति का अनुमान ।
● व्यक्गित करदाताओं को सालाना 4,44,200 रूपये की आय पर विभिन्न प्रावधानों के तहत छूट उपलब्ध होगी।
● पेंशन योजना में सालाना 50 हजार रूपये तक के योगदान पर कर छूट। कर्मचारियों की मासिक परिवहन भत्ता कर छूट को 800 रूपये से बढ़ाकर 1600 रूपये किया गया ।
● स्वच्छ भारत कोष और गंगा सफाई कोष में दान करने पर शत प्रतिशत कर छूट का प्रस्ताव।
● स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर आयकर कटौती की सीमा 15 हजार रूपये से बढ़ाकर 25 हजार रूपये करने का प्रस्ताव, बुजुर्गो के मेडिकल खर्च पर 30 हजार रूपये तक कर कटौती।
● केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दर बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत, सेवा कर की दर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव
● कुडनकुलम परमाणु उर्जा संयंत्र की दूसरी इकाई 2015.16 में परिचालन में आ जायेगी, 4000,  4000 मेगावाट क्षमता के पांच अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट स्थापित किये जायेंगे
● सम्पत्ति कर समाप्त, एक करोड़ रूपये से अधिक की आय वाले व्यक्तियों पर दो प्रतिशत का अतिरिक्त अधिभार
● कालाधन पर जुर्माला कर देनदारी का 300 प्रतिशत लगाया जायेगा, कर चोरी करने वाले मामलों सुलझाने के लिए निपटान आयोग में नहीं जा सकेंगे
● सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) का क्रियान्वयन दो साल के टाला गया।
● इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, व्यक्तिगत कारदाताओं को कर छूट मिलती रहेगी, एक लाख रूपये से अधिक के सौदों पर पैन का उल्लेख जरूरी, बेनामी कारोबार पर अंकुश के लिए विधेयक चालू संसद सत्र में लाया जायेगा
● कालाधन छिपाने पर 10 साल तक की कैद, विदेशी सम्पत्तियों को छिपाने वालों को जेल की कठोर सजा सहित कर चोरी के खिलाफ और सख्त होंगे कानून
● कारपोरेट कर की दर चार साल में 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत लायी जायेगी
● 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 प्रतिशत, राजस्व घाटा 2.8 प्रतिशत, कुल बजट खर्च 17 लाख 77 हजार 477 करोड़ रूपये
● 2015-16 का रक्षा बजट 2.46 लाख करोड़ रूपये, स्वास्थ्य के लिए 37152 करोड़ रूपये, शिक्षा के लिए 68,000 करोड़ रूपये से ज्यादा का प्रावधान ।
● समन्वित बाल विकास योजना के लिए 1500 करोड़ रूपये, समन्वित बाल संरक्षण योजना के लिए 500 करोड़ रूपये और प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के लिए 3000 करोड़ रूपये का प्रावधान
● कर्मचारियों को ईपीएफ और नई पेंशन योजना में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जायेगा
● बिहार और पश्चिम बंगाल को आंध्रप्रदेश की तर्ज पर विशेष सहायता देने का प्रस्ताव
● दीनदयाल उपाध्याय हुनर योजना का प्रस्ताव । जम्मू कश्मीर, पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, असम में एम्स खोले जायेंगे
● वायदा बाजार आयोग को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड में मिलाने का प्रस्ताव
● विभिन्न चरणों में 150 देशों को आगमन पर बीजा की सुविधा देने का प्रस्ताव
● सड़क, रेल परियोजनाओं के लिए कर मुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर बांड पेश किया जायेगा
● 2015-16 में अनुसूचित जाति के लिए 30,851 करोड़ रूपये और महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए बजट में 79,258 करोड़ रूपये का प्रावधान
● प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना शीघ्र, 12 रूपये के सालाना प्रीमियम पर दो लाख रूपये का दुर्घटना बीमा होगा
● देश में नवोन्मेष की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए ‘अटल नवोन्मेष मिशन पेश किया जायेगा
● खस्ताहाल कंपनियों के लिए एक नयी समग्र संहिता लायी जायेगी
● मनरेगा के लिए प्रारंभिक प्रावधान 34,699 करोड़ रूपये
● ग्रामीण आधारभूत संरचना कोष के लिए 2015-16 में 25 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान
● अल्पसंख्यक युवाओं के लिए ‘मंजिल’ योजना। अल्पसंख्यक मंत्रालय को 2015-16 के लिए 3738 करोड़ रूपये का प्रावधान

● 11.5 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं को सब्सिडी का खाते के जरिये नकद भुगतान, सांसदों, मंत्रियों समेत सम्भ्रांत लोग स्वेच्छा से सब्सिडी का त्याग करेंगे
● बुजुर्गो के लिए वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष बनाने का प्रस्ताव
● सभी भारतीयों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनेगी, जनता के लिए ‘अटल’ पेंशन योजना
● छोटे कारोबारियों की ऋण सुविधा के लिए 20 हजार करोड़ रूपये के कोष से मुद्रा बैंक बनाया जायेगा
● 2015-16 में किसानों को 8.5 लाख करोड़ रूपये कृषि ऋण देने का लक्ष्य
● नयी व्यवस्था में कुल राजस्व में राज्यों का हिस्सा 62 प्रतिशत और केंद्र का हिस्सा 38 प्रतिशत होगा
●  जनधन योजना में 60 साल बाद पेंशन का प्रावधान
● चालू वित्त वर्ष में राजोषीय घाटे को 4.1 प्रतिशत रखने का लक्ष्य हासिल किया जायेगा, दो की बजाए तीन साल में तीन साल में 3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य
● कोयला ब्लाकों की पारदर्शी नीलामी से संबंधित राज्यों को रायल्टी से लाखों करोड़ रूपये मिले हैं
● 50 लाख शौचालय बनाये जा चुके है, 6 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य हासिल किया जायेगा
● खुदरा मुद्रास्फीति की दर वर्ष के अंत तक 5 प्रतिशत रहने का अनुमान
● चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान, रूपया 6.4 प्रतिशत मजबूत हुआ

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